May 30, 2023

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भारतीय जागरूकता समिति ने दी साईबर क्राईम के विषय में जानकारी

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भारतीय जागरूकता समिति के अध्यक्ष ललित मिगलानी

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ब्यूरो न्यूज़ डेस्क
भारतीय जागरूकता समिति ने दी साईबर क्राईम के विषय में जानकारी
हरिद्वार, 2 मई। आजकल सब लॉकडाउन की वजह से घर पर ही हैं और अपना अधिकतर समय इंटरनेट के माध्यम से गुजार रहे हैं। ऑफिस वर्क, बैंक लेन देन, बिल जमा करने सहित सभी कार्य करीब-करीब इंटरनेट के माध्यम से ही हो रहे हैं। कई लोगों ने इंटरनेट को पहली बार उपयोग किया है। ऐसे में कई लोग इसका गलत उपयोग कर लोगो को ठगने का कार्य भी कर रहे हैं। जिससे सोशल क्राइम में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसलिए सोशल क्राइम को समझना जरुरी है। जिसके लिए भारतीय जागरूकता समिति के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता ललित मिगलानी ने लोगों को साइबर क्राइम को कानूनी रुप से समझने की कोशिश की है। मिगलानी ने बताया कि साइबर क्राइम कंप्यूटर, मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से किया जाता है। इसमें कंप्यूटर को सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाता है। साईबर क्राइम कई प्रकार के होते हैं जैसे- स्पैम ईमेल, हैकिंग, वायरस डालना, किसी की व्यक्तिगत या ऑफिशियल जानकारी को प्राप्त करना, किसी के अकाउंट पर नजर रखना। यह सारे अपराध साइबर क्राइम के अंतर्गत आते हैं। साइबर क्राइम करने वाले अपना काम बेहद चालाकी से करते हैं और कई बार उनके बारे में कुछ पता भी नहीं चलता है। मिगलानी ने बताया कानून ऐसे मामलो में काफी सख्त है। कानून में इस प्रकार के अपराधो को रोकने के लिए कड़े नियमो का उल्लेख है। यदि कोई व्यक्ति हैकिंग करता है तो कानून में आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (ए), धारा 66 – आईपीसी की धारा 379 और 406 के तहत कार्रवाई की जाती है। अपराध साबित होने पर तीन साल तक की जेल या पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। किसी का डेटा चोरी करने पर आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 43 (बी), धारा 66 (ई), 67 (सी), आईपीसी की धारा 379, 405, 420 कॉपीराइट कानून के तहत कार्रवाई होती है। जिसमें अपराध की गंभीरता के हिसाब से तीन साल तक की जेल या दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वायरस स्पाईवेयर फैलाना आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (सी), धारा 66 एवं आईपीसी की धारा 268 के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है। देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के लिए फैलाए गए वायरसों पर साइबर आतंकवाद से जुड़ी धारा 66 (एफ) लागू (गैर-जमानती) होती है। जिसमें साइबर-वॉर और साइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। दूसरे मामलों में तीन साल तक की जेल या जुर्माना।

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